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Sunday, July 19, 2020

सफलता1

सफलता1

हर व्यक्ति अपने जीवन में असीमित सफलता की कामना रखता है। हर व्यक्ति की सफलता की परिभाषा अलग अलग होती है और यह व्यक्ति दर व्यक्ति देश काल और परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। सफलता के और बढते व्यक्ति को सिर्फ दूर स्थित शिखर ही दिखाई पड़ता है और शिखर की और बढते कदम को गति और लय सकारात्मक सोच ही देती है।और उम्मीद आशए उत्साह देती है जिसका परिणाम सुखद ही होता है। अक्सर सफलता का पहला कदम असफलता से शुरू होता है। असफलता क्या है??? यही न कि हम अपने सर्वोतम प्रयास बाद भी उस काम का श्रेष्ठ फल प्राप्त नहीं कर पाये पर मैरा मानना है कि असफलता कभी भी स्वीकार्य नही होनी चाहिए,और फिर से सर्वोत्तम के लिए कोशिश होनी चाहिए मतलब कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। मित्रों यकीन मानिए सफलता की संभावना तभी होगी जब आप अपनी गलतियों पर अफसोस करना छोड़ देंगे पर उनसे सीख लेना जारी रखेंगे। एक बात और है सफलता प्राप्त करने की राह में असुरक्षा का अहसास बनाए रखना चाहिए क्योंकि मैरा मानना है कि अगर आप में यह अहसास नहीं है तो आप मैं नये रास्ते खोजने के और उन पर चलने की लालसा समाप्त हो जायेगी जो कि सफलता में बाधक है। बदलाव ही सफलता लाता है तो जरूरत है प्रतिदिन प्रति क्षण कुछ नया  सोचने की नया करने की अर्थात  आपके जीवन में प्रतिदिन कुछ नया होना चाहिए। कुछ नया सोचने के लिए जरूरी नहीं है कि परिवर्तन बड़े पैमाने पर हो। छोटे छोटे प्रयास भी करिश्माई होतें हैं। परिवर्तन करने के लिए आपको रचनात्मक होना पड़ता है और रचनात्मकता जब आती है जब आप ऐसा कुछ करते हैं जो सामान्यतः लोगों की कल्पना में भी नहीं होता। मतलब सामान्य लोगों की कल्पना से परे जाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करें और डर और भ्रम  की अवस्था से निकल कर असंभव को संभव में परिवर्तित करे। मतलब आप धनुष तानते हैं तो सबसे मजबूत धनुष ताने और अगर आप तीर का उपयोग करते हैं तो सबसे लंबे तीर का प्रयोग करें।  हम उत्साह से ज्यादा सफल होते हैं ना कि टेलेंट से क्योंकि व्यक्ति अगर योग्य है पर जोश का अभाव है तो भी सफलता दूर है। 
मेरा मानना है कि जीवन की श्रेष्ठा का लक्ष्य सिर्फ हार जीत या सफलता या असफलता से तय नहीं होता, बल्कि वतमान में जीवन की श्रेष्ठता या प्रतिष्ठा इस बात पर निर्भर नहीं करती हैं कि क्या दिखता है, जितनी इस बात पर निर्भर करती है कि क्या छिपाया गया। 
प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री

काबिल विरोधी चुनिए......

काबिल विरोधी चुनिए......
ऐसा लगता है कि सफलता का सर्वोच्च स्थान पाने के बाद उससे बड़ा कोई उद्देश्य नहीं रह जाता ....अपने जीवन में आशा और भावना के बीच एक संतुलन लाना आवश्यक है  और इसके लिए आपको अपने हर लक्ष्य की ऊँचाई को पिछली बार से बढ़ाना पड़ेगा ।
एक मंजिल को हासिल करने के तुरंत बाद  दूसरा ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करे....लक्ष्य निर्धारित किया गया वही आपको व्यस्त रखेगा वयस्त तभी रह सकते हो जब आपके सामने कोई ज्यादा काबिल विरोधी हो।कई सालों में मैंने सीखा है कि जब मैंने अपने काबिल विरोधीयो के सामने होती तो मैं अपने ज्ञान का सबसे बढ़िया प्रदर्शन करती थी।वे बुद्धिमान और उच्च कोटि के लोग जो असाधारण रूप  से अपने विषय मे केंद्रित थे उन्होंने मुझे प्रेरित किया की मैं अपने विषय पर पकड़ बनाऊ और प्रभावशाली बन सकूँ ।मेरे सबसे काबिल प्रतिवादियो ने मुझे अपने आप से सर्वोच्च स्तर का प्रदर्शन करने के लिए बाध्य किया और मुझे पहले से भी बेहतर बना दिया ।
अनिवार्य लक्ष्य आपके विशेष गुणों के लिए एक रास्ता खोल देते हैं ।याद रखिए हीरे को तराशने के लिए भी दबाव की आवश्यकता होती हैं .......अतः यह निर्धारित कीजिए की आपके लक्ष्य आपके लायक है तथा यह भी निश्चित करिए कि आपके लक्ष्य में चुनौतियाँ सम्मिलित हो......सिर्फ इतनी सी बात है ....जीवन में आपका विरोधी यकीनन काबिल होना चाहिए ......श्रेष्ठता को विरोधी चुनिए......

डॉ प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री