नमस्कार मित्रों
पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रभाषा हिन्दी की राजकीय काम काज में उपयोगिता पर मतभेद बने हुए हैं। मेरा मानना है कि ये दुर्भाग्यपूण और निरथक है। हर देश की एक sarvswikary राजकीय भाषा होती है। मित्रों अगर आप भाषाई दृष्टि से पूरे विश्व का अवलोकन करें तो भारत सवाधिक भाषई विविधता वाला देश है, जिसमें लगभग 780 भाषायें और 66 लिपि है, और ये आकडा पीपुल्स लिग्वसिटक सवे आफ इंडिया के दवरा दिया गया है। मित्रों एक बात मुझे गौरवान्वित और harsh prdan karti hai।कि ये हमारा ही देश है जिसमे साहित्य की समृद्ध परंपराए है और वो भी जीवंतता व विविधता से भरपूर है। राष्ट्रभाषा किसी भी राष्ट्र के लिये उतनी ही जरूरी है जितनी शरीर के लिए आत्मा, और आत्मा ही किसी समुदाय में राष्ट्र pream की आस्था पैदा करती है। एक बात और है कि किसी भी भाषा को समिृध तभी pratp तभी होती है जब उस भाषा के दवरा उत्कृष्ट साहित्य का निर्माण हो। भाषा sampresan का माध्यम है और अभिव्यक्ति ही वह साधन जो मानव को sarw श्रेष्ठता prdan karti hai मेरा ऐसा मानना है कि कोई भी व्यक्ति अपने मनोभावों की सरल और सहज अभिव्यक्ति अपनी मातृभाषा के दवरा ही पेषित कर सकता है।
मित्रों मैं अग्रेजी या अन्य किसी भी भाषा के विरोध में नहीं हूँ। अग्रेजी भाषा के चलते हमारी राष्ट्रभाषा की दुगति की शुरुआत तो काफी पहले ही हो गई थी। 19वी सदी में भारत का स्वरूप एक ंभाषा के आधार पर सोचा गया। जिसके परिणाम स्वरूप हमारे कई राज्य अस्तित्व में आये।
वतमान परिस्थिति में अगर antarrastiy परिदृश्य को देखें तो भारत एक वैश्विक उभरती हुई आथिर्क शक्ति का pradershan कर रहा है पर उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।क्योंकि इस सब में देश सासकृतिक ister per अपनी भाषाओं को नकार रहा है। किसी भी राष्ट्र का विकास या विनाश उसकी ससकृति पर ही निर्भर करता है। मेरा मानना है कि हमें भी किसी विदेशी भाषा के साथ वही व्यवहार करना चाहिए जो दुनिया के दूसरे विकसित देशों ने किया यानि अपनी भाषा को saraksan दे हम विकास करे। मैरा मानना है कि pragati के लिए अग्रेजी की अनिवार्यता कहीं भी नहीं है
राष्ट्र भाषा के saraksan का काम अगर देश की संसद से शुरू होता है तो मैं इसे सकारात्मक रूप में दैखूगी क्योंकि अब समय यह कहता है कि बदलाव की जरूरत और शुरूआत निचले स्तर से न हो कर उपर से होनी चाहिए।
मुझे लगता है कि राष्ट्रभाषा के अच्छे दिन आ गए
Dr priyadarshini agnihotri
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