सर्वश्रेष्ट,विकल्प और चुनाव जैसे शब्दो से संभावनाओं की ऐसी जबरदस्त शक्ति उतपन्न होती है जो उनसे प्राप्त लाभो की वास्तविकता से आगे तक जाती है। ंअकसर ए और बी में से किसी एक को चुनना होता है,,, और सभी विकल्प चुनने का विकल्प की हल्की सी मृगमरीचिका रहती है और जो लोग विकल्प चुन रहे उनको यह विश्वास ंही नहीं होता कि उन्हें धोखा दिया जा रहा है या उनका शोषण हो रहा है। और मित्रों यकीन मानिए कि servesheth धोखा वह होता है जिसमें आप सामने वाले को विकल्प देते हैं मतलब हम दो बुरी चीज में से कम बुरी बात को चुनने के लिए विवश करते हैं। मतलब उन्हें दुविधा के सीगो पर बिठा देते हैं चाहे जिधर मुड़े उन्हें घायल होना ही है। अगर मैं वतमान। परिस्थिति के सन्दर्भ में बात करूँ तो नयी सरकार ने भी विकल्पों में रगं भरने जैसी तकनीक अपनायी है। मेरे कहने का मतलब यह है कि अतत दुसरे के दवरा दिया गया घाव और बुरी बातो से ज्यादा दर्दनाक वे घाव और बुरी बातें होती हैं जिन्हें मनुष्य खुद विकल्प चुन कर मोल लेता है। पर इस बार जनता को जो विकल्प चुनने मिला है वह उतम है वो विकल्प नहीं देश का विकास है। जनता का यह चुनाव समय की कसौटी पर खरा उतरेगा मुझे तो विश्वास है कि अच्छे दिन आ गए।
Dr priyadarshini agnihotri
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