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Wednesday, June 03, 2020

Notes on सौर मंडल Solar System for UPSC

ब्रह्मांड में से 2 अरब सौर मंडलों में से वर्तमान सौरमंडल (सूर्य और उसके ग्रह) एक है सूर्य और उसके परिभ्रमण करने वाले ग्रहों उपग्रहों ,उल्काएं,   धूमकेतु अवांतर ग्रहों आदि को संयुक्त रूप से सौरमंडल कहा जाता है। सौरमंडल की उत्पत्ति गैस और धूल की जलती हुई निहारिका से हुई है ।।सूर्य के चारों ओर घूमने वाले ग्रह कहलाते हैं इन्हें मिलाकर सौरमंडल बनता है इनकी संख्या 8 है ।ग्रह पृथ्वी के समान ही हैं और सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं तथा सभी ग्रह एक निश्चित पथ  पर सूर्य का चक्कर लगाते हैं । ग्रहों नाम के अंग्रेजी रोमन देवताओं के नाम पर रखे गए हैं। ये आकाशीय पिण्ड हैं जो सूर्य की प्रदक्षिणा करते हैं, इनका अपना प्रकाश नहीं होता है एवं ये सूर्य से ऊष्मा तथा प्रकाश प्राप्त करते हैं
 
सौरमण्डल के ग्रह (बढ़ती दूरी के क्रम में) - बुध (Mer cury), शुक्र (Venus), पृथ्वी (Earth), मंगल (Mars), बृहस्पति (Jupiter), शनि (Saturn), अरुण (Uranus), वरुण (Neptune)

ग्रह (घटते आकार के क्रम में): बृहस्पति, शनि, अरुण, अरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल, बुध। आंतरिक ग्रह (Inner Planets) सूर्य के अपेक्षाकृत नजदीक है। ये छोटे ग्रह हैं किन्तु इनका घनत्व अधिक है। बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह आंतरिक ग्रह हैं। इन्हें धरातलीय ग्रह (Ter terrestrial Planets) भी कहा जाता है।
बाह्य ग्रह (Outer Planets) आकार में बड़े किन्तु कम घनत्व वाले ग्रह हैं, इन्हें प्रमुख ग्रह (Major Planet) भी कहा जाता है। ये हैं - बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण। उपग्रह (Satellites) : ये ग्रहों की परिक्रमा करते हैं। इन्हें आकाशीय पिण्ड की तीसरी पीढ़ी कहा जाता है। 

सूर्य (Sun)

. सूर्य के संगठन में 71% हाइड्रोजन तथा 26.5% हीलियम एवं अन्य 2.5% अन्य तत्व है। सूर्य की उर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है। सूर्य के केन्द्र में हाइड्रोजन परमाणु के संलयन से हीलियम परमाणु का निर्माण हो रहा है। सूर्य की उम्र -5 बिलियन वर्ष है। सूर्य पृथ्वी से 15 लाख गुना बड़ा है। इसका व्यास लगभग 14 लाख कि.मी. है। सूर्य का केन्द्रीय भाग क्रोड कहलाता है जिसका ताप 15मिलियन डिग्री सेल्सियस है। सूर्य के बाहरी सतह का तापमान 6000°C है। सूर्य सूर्य अपनी धुरी पर घूमता है और 25 दिनों में एक पूरा चक्कर लगाता है। सूर्य एक तारा है जो हमारी आकाश गंगा (मिल्की वे) के केन्द्र के परितः 250 कि.मी. प्रति सेकेण्ड की गति से लगभग एक वृत्तीय पथ पर घूम रहा है। सूर्य 250 मिलियन वर्षों में केन्द्र का एक पूरा चक्कर लागता है। इस समय को 'कास्मिक वर्ष' कहते हैं। सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता 
सूर्य की दीप्तिमान सतह को प्रकाश मंडल कहतेहैं(photosphere)। प्रकाश मंडल के किनारे प्रकाशमान नहीं होते, क्योंकि सूर्य का वायुमंडल प्रकाश के किनारे प्रकाशमान नहीं होता, क्योंकि सूर्य का वायुमंडल प्रकाश का अवशोषण कर लेता है। इसे वर्णमंडल, कहते हैं। इसका रंग लाल होता है। सूर्य ग्रहण के समय सूर्य के दिखाई देने वाले भाग को सूर्य किरीट (corona) कहते हैं। कोरोना X-ray को उर्जित करता है। पूर्ण सूर्यग्रहण के समय कोरोना से प्रकाश की प्राप्ति होती है।


सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 8 मिनट 16.6 सेकेण्ड लगता है। प्रकाश की गति -3x10 m/s है। सूर्य पृथ्वी से 109 गुना बड़ा है एवं इसका वजन 2x107 टन है।
सौर कलंक - सूर्य के परिमंडल में दिखने वाले धब्बे, जिनका तापमान सूर्य के सतह से काफी कम(1500°C) होता है। सौर कंलको की अधिकता के समय पृथ्वी पर चुंबकीय आधिंयो का जन्म होता है ।प्रकाश की गति -3x10 m/s सूर्य पृथ्वी से 100 गुना बड़ा है एवं इसका वजन 2x10 ठल है ।

 सौर ज्वाला- सूर्य से हर दिशा में प्रक्षेपित प्रोटॉन का बहुत अधिक उत्सर्जन कमी-कमी 700 कि.मी. प्रति सेकेण्ड की गति तक तीव्र होकर पार कर अंतरिक्ष में चला जाता है, जिसे सौर ज्वाला के नाम से जाना जाता है। 
ग्रह (planet)- तारों की परिक्रमा करने वाले प्रकाश रहित आकाशीय पिंड जो अपने केन्द्रवर्ती तारे के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं और उसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं, ग्रह कहलाते हैं। ग्रहों की संख्या 8 है- बुध शुक्र, पृथ्वी मंगल, बृहस्पति, शनि, अरूण(यूरेनस) और वरूण (नेप्चून)। प्लूटो का ग्रह के रूप में दर्जा अंतर्राष्ट्रीय खगोल शास्त्रीय संघ द्वारा समाप्त कर दिया गया है। 
बुध (Mercury).
बुध सूर्य के निकटतम ग्रह है, जिसकी सूर्य से औसत दूरी 5 करोड़ 80 लाख कि.मी. है। यह सबसे छोटा ग्रह है एवं इसका एक भी उपग्रह नहीं है। यह ग्रह सूर्य का चक्कर 88 दिनों में पूरा करता है। इस ग्रह का घनत्व 5.5 सेमी. है, जो पृथ्वी के घनत्व के बराबर है। इस ग्रह में चुंबकीय क्षेत्र होना इसका एक विशिष्ट गुण है।

शुक्र (Venus) यह पृथ्वी का निकटतम ग्रह है। इस ग्रह का घनत्व, आकार तथा व्यास पृथ्वी के समान है। अत: इसे .
'पृथ्वी का भगिनी, ग्रह' कहा जाता है। शुक्र ग्रह सूर्य का चक्कर 225 दिनों में पूरा करता है। इसके वायुमंडल में 97 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड पायी जाती है इसी कारण यह आकाश में सूर्य और चांद के बाद सबसे चमकीला दिखाई देता है। इस ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है। इसे सांझ का तारा एवं एवं भोर का तारा भी कहा जाता है। यह सबसे गर्म ग्रह है इसकी सतह का तापमान 475°c है। ये अन्य ग्रहों के विपरीत  दक्षिणावर्त (Anticlockwise) चक्र करता  है।

पृथ्वी (Earth) यह सौरमंडल का एक मात्र ग्रह है, जिसपर जीवन है। यह सूर्य से तीसरा निकटतम ग्रह है तथा आकार में पांचवा बड़ा ग्रह है।  यह अपने अक्ष पर 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकेण्ड में एक पूरा चक्कर लगाता है। यह ग्रह अपने अक्ष पर 23 1/2°झुका हुआ है। इसका अक्ष इसकी कक्षा के सापेक्ष 66.5° का कोण बनाता है। पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चंद्रमा है। आकार और बनावट की दृष्टि से पृथ्वी, शुक्र के समान है। सूर्य के बाद पृथ्वी के सबसे निकट का तारा प्रोक्सिमा-संचूरी है, जो अल्फा सेंचुरी नामक समूह का एक तारा है। यह पृथ्वी से 4.5 प्रकाश वर्ष दूर है। जल की उपस्थिति के कारण पृथ्वी को नीला ग्रह कहते हैं। पृथ्वी का विषुवत रेखीय व्यास 12756 कि.मी. और ध्रुवीय व्यास 12714 कि.मी. है। 
मंगल 
मंगल सूर्य का चौथा निकटतम ग्रह है। इसे लाल ग्रह कहा जाता है। इसका रंग लाल आयरन ऑक्साइड के कारण है।

यहां पृथ्वी के समान ही दो ध्रुव हैं तथा इसका कक्षातली 25 के कोण पर झुका हुआ है, जिसके कारण यहां पृथ्वी के समान ऋतु परिवर्तन होता है। इसके दिन का मान और अक्ष का झुकाव पृथ्वी के समान है। यह अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार चक्कर लगाता है। इस ग्रह के दो उपग्रह हैं, फोबोस और डेमोस। डेमोस आतंक का घोतक है। सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलंपिक गेम एवं सौर मंडल का 
का सबसे ऊंचा पर्वत 'नीक्स ओलंपिया, जो माउंट एवरेस्ट से ी गुना ऊंचा है, इसी ग्रह पर स्थित है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 687 दिन लगते हैं। इसके वायुमंडल में मुख्यत: कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन व अक्रिय गैस पाई जाती है।
बृहस्पति
 बृहस्पति सौर मंडल का सबसे बड़ा और भारी ग्रह है। इसे अपनी धुरी पर चक्कर लगाने में 10 घंटा (सबसे कम) और सूर्य की परिक्रमा करने में 12 वर्ष लगते हैं। इसके वायुमंडल में मुख्यत: मिथेन अमोनिया और हाइड्रोजन गैसें पाई जाती है। इसके उपग्रहों की संख्या 16 है, जिसमें ग्यानीमीड सबसे बड़ा उपग्रह है । इसका धनत्व 1.3 ग्राम प्रति धन से.मी. है तथा इसके सतह का ताप -123°c है। बृहस्पति पृथ्वी से 11 गुना भारी है। यह पीले रंग का ग्रह है।

शनि
 (Saturn) शनि, बृहस्पति के बाद सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। शनि ग्रह के चारो ओर सुंदर वलय पाये जाते हैं। इन वलयों की संख्या 7 है।  इसके उपग्रहों की संख्या 23 है। शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है, जो आकार में बुध के बराबर है। 'फोबे' नामक शनि का उपग्रह इसकी  कक्षा में घूमने की विपरित दिशा में परिक्रमा करता है। शनि ग्रह का घनत्व 0.68 ग्राम प्रति घन से.मी. है, अत: यह सबसे कम घनत्व वाला ग्रह है। इस ग्रह के सतह का ताप -180°c है। यह आकाश में पीले तारे के समान दिखाई पड़ता है।

अरुण (Uranus) सूर्य का सातवां दूरस्थ ग्रह एवं आकार में वृहस्पति और शनि के बाद तीसरा बड़ा ग्रह है। इस ग्रह की खोज 1781 ई. में बिलियन हर्षेव ने की थी। शनि की भांति ही इस ग्रह के चारो ओर भी वलय पाये जाते हैं इन वलयों में अल्फा, बीटा डेल्टा एवं एप्सीलाव हैं ।वह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम घूमता है, जबकि अन्य ग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर घूमते हैं। यहां सूर्योदय पश्चिम की ओर और सूर्यास्त पूर्व की ओर होता है। इसके सभी उपग्रह भी पृथ्वी के विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते हैं। इस ग्रह के सतह का ताप 218c है। इस ग्रह का घनत्व 1.8 ग्राम प्रति घन से.मी. है। इस ग्रह के वायुमंडल में मिथेन गैस की उपस्थिति के कारण इसका प्रकाश हरे रंग का दिखता है। यह अपनी धूरी पर सूर्य के ओर इतना झुका हुआ है कि इसे 'लेटा हुआ ग्रह' कहते हैं।

वरुण
(Neptune) यह सूर्य का आठवां दूरस्थ ग्रह है। इसकी खोज 1846 ई. में जॉन गैले ने की थी। इस ग्रह के वायुमंडल में मुख्य रूप से हाइड्रोजन गैस पाई जाती है। इसके साथ ही इसके चारो और अति शीतन मिथेन का बादल छाया रहता है, फलत: यह ग्रह हरे रंग का दिखाई देता है। इस ग्रह का घनत्व 1.6 ग्राम प्रति घन से.मी. व सतह का ताप -228°c है। यह 166 वर्षों ये सूर्य की परिक्रमा करता है और 12.7 घंटे में अपनी दैनिक गति पूरा करता है। इसके 8 उपग्रह हैं, ट्रेन, मेरिड, N-1,N-2,N-3 आदि प्रमुख उपग्रह हैं।

क्षुद्र ग्रह (Astroid) मंगल एवं बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच परिक्रमा करने वाले असंख्य छोटे-छोटे तारों को शुद्र ग्रह था अवांतर ग्रह कहते हैं। इनकी संख्या लगभग 45000 है। सीरस, जूनों इरीज, वेस्टा, फलाश आदि प्रमुख क्षुद्र ग्रह हैं। ये आकार में चंद्रमा से भी काफी छोटे हैं। चार वेस्टा (4 वेस्टा) एकमात्र क्षुद्रग्रह है, जिसे आखों से देखा जा सकता है। 
धूमकेतु (comets)- धूमकेतू का निर्माण गैसीय पदार्थों से होता है। ये सुर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य के निकट आने पर सूर्य के ओर स्थित भाग के पदार्थों के वाष्पीकरण से इनके सिर का निर्माण होता है। इसकी पूंछ सदैव सूर्य से दूर रहता है। टेम्पल-1 हैली, फोर्ब्स, हेलवाप, डी-ओरेस्ट, कोमास-सोला आदि प्रमुख धूमकेतू हैं। शताब्दी का सर्वाधिक चर्चित धूमकेतू हैली है, जिसका आवर्तकाल 76 वर्ष है। उल्का ये रात में टूटते तारे के समान प्रतीत होते हैं, पर याथार्थ में ठोस आकाशीय पदार्थ हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर घर्षण के कारण जलने लगते हैं एवं चमकीला प्रकाश उत्पन्न करते हैं। कभी-कभी ये टुकड़े उल्कापात के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं। इनमें लोहा एवं निकल जैसे भारी धातुओं की प्रधानता होती है। जून, 1908 में इर्कुटस्क (साइबेरिया) था 1947 में पूर्वी साइबेरिया में उल्का पात से उत्पन्न गर्त आज भी देखे जा सकते हैं।

चन्द्रमा (Moon) चन्द्रमा की पृथ्वी से दूरी 38400 कि.मी. है। . चन्द्रमा का व्यास 3478 कि.मी. है, जो पृथ्वी के व्यास का एक चौथाई है।

चन्द्रमा का भार पृथ्वी के भार का पांचवा हिस्सा और आयतन 1/50 वां भाग है। चन्द्रमा पर स्थित धूल के मैदान को शान्ति सागर कहते हैं। यह चन्द्रमा का पिछला भाग है, जो अंधकारमय होता है। चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है। और इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक घूर्णन करता है। यही कारण है कि चंद्रमा का सदैव एक ही भाग दिखाई पड़ता है। पृथ्वी से चन्द्रमा का 57% भाग ही देख सकते हैं। ज्वार उठने के लिए अपेक्षित सौर चन्द्रमा की शक्तियों का अनुपात 19:5है।  चन्द्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहते हैं। पृथ्वी की भांति चन्द्रमा का भी अपना कोई प्रकाश नहीं है, यह पृथ्वी का एक मात्र उपग्रह है। चन्द्रमा पर दिन का तापमान 100°c और रात का तापमान -180°C रहता है।

चन्द्रमा की सतह और उसके आंतरिक भाग का अध्ययन करने वाले विज्ञान को सेलेनोलाॅजी कहते हैं